Saturday, 13 June 2020

आसमाँ में मत ढूंढ़ अपने सपनों को, सपनों के लिए तो जमीं जरुरी है







तूफानों से आँख मिलाओ,


सैलाबों पर वार करो,


मल्लाहों का चक्कर छोड़ो,


तैर के दरिया पर करो।


दर्द को उलझाए रखो,


औरों से छुपाये रखो,


चाहे कितने भी मिलें ग़म,


मुस्कान चेहरे पर बनाये रखो।


जब तक कदम रुके रहे तब तेज थी हवा,


नजरें उठाई जैसे ही तूफान रुक गया,


एक पैतरे के साथ ही बिजली चमक उठी,


उसने उड़ान ली तो आसमान झुक गया।


हौंसले हो बुलंद तो हर मुश्किल को आसां बना देंगे,


छोटी टहनियों की क्या बिसात, हम बरगद को ही हिला देंगे !


वो और हैं जो बैठ जाते हैं थक कर मंजिल से पहले,


हम बुलंद हौंसलों के दम पर आसमां को ही झुका देंगे !








आसमाँ में मत ढूंढ़ अपने सपनों को,


सपनों के लिए तो जमीं जरुरी है,


सबकुछ मिल जाये तो दुनिया में क्या मजा,


जीने के लिए एक कमी भी जरुरी है।


सोच को बदलो सितारे बदल जायेंगे,


नजर को बदलो नज़ारे बदल जायेंगे,


कश्तियाँ बदलने से कुछ नहीं होता,


दिशाओं को बदलो किनारे बदल जायेंगे।


कर्म करो तो फल मिलता है,


आज नहीं तो कल मिलता है,


जितना गहरा अधिक कुआँ हो,


उतना मीठा जल मिलता है।


यही जज्बा रहा तो मुश्किलों का हल भी निकलेगा,


जमीं बंजर हुई तो क्या वहीं से जल भी निकलेगा,


न मायूस हो न घबरा अंधेरों से मेरे साथी,


इन्हीं रातों के दामन से सुनहरा कल भी निकलेगा।








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